अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
12.22.2007
 

मंत्री बनाओ तो कोई बात बने
रविशंकर श्रीवास्तव ‘रतलामी’


एमपी, एमएलए बनाओ तो कोई बात बने
मंत्री महोदय पुकारो तो कोई बात बने

चोर लुटेरा न पुकारो मुझे मेरे वोटरों
मुझे चुन के दिखाओ तो कोई बात बने

औरों के भाषण पिए जा रहे हो कबसे
थोड़ा मुझको भी सुनलो तो कोई बात बने

ज़माने से दूसरों को वोट फेंकने वालो
अबकी मुझको जिताओ तो कोई बात बने

कुर्सी के लिए सूख के ख़ार हो गए
कोई पद-प्रतिष्ठा दिलाओ तो कोई बात बने

पार्टी पब्लिक को फिर कौन पूछे ‘रवि’
हमें चुन के बिठाओ तो कोई बात बने

अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें