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| 12.22.2007 |
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क्या मिलना है भगदड़ में |
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क्या मिलना है भगदड़ में
जीना मरना है भगदड़ में मित्रों ने है कुचला हमको अच्छा बहाना है भगदड़ में लूटो या ख़ुद लुट जाओ यही होना है भगदड़ में जीवन का नया वर्णन है फँसते जाना है भगदड़ में तंग हो के रवि भी सोचे शामिल होना है भगदड़ में |
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