रविशंकर श्रीवास्तव रतलामी


कविता

क्या मिलना है भगदड़ में
मंत्री बनाओ तो कोई बात बने
मनुज आजन्म गंदा न था
मुद्दतों से वो आईना दिखाते रहे
यूँ तो बड़ा अलाल तू