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ISSN 2292-9754

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01.28.2019


विदा 2018

दिन-महीने-साल
सब कुछ बदलते रहे हैं
बदलते रहेंगे
वक़्त-नज़र-नज़रिया भी
पंख लगा कर
करवट लेते रहे हैं
न जाने कितने कलैण्डर
वर्तमान से भूत हो गए
समय के साथ हर तरफ़ बदलाव हुआ
मौसम-राग-अनुराग
सब कुछ बदला

बच्चे का बचपन भी गया
किशोर का कैशोर्य
बूढ़ों का बुढ़ापा भी
नई परिभाषाएँ चाहने लगा
क्रूर काल के विकराल हाहाकार में

मासूमियत
प्यार-स्नेह-अपनत्व
सब कुछ केंचुली बदल चुके
नहीं बदला
तो सिर्फ सफ़ेदपोशों का चरित्र
बदलाव की भूंड चढ़े समय की
चाल-चलन और चरित्र
महिलाओं की कन्या राशि का शास्त्र
ग़रीब की लाचारी व दीनता
समर्थवान की अर्थसत्ता
व स्वयंसिद्धा होने का मंत्र
बेकारी, भूखमरी
और पद-लोलुपता का
एकमुखी यंत्र
या फिर अंधे की रेवड़ी का मुहावरा!!

रे समय!! रहम कर!!!
सब कुछ ले ले हमसे
बस!
संस्कार-संस्कृति और
 सामाजिक सरोकार न छीन
वरना हम अपराधी होंगे
आने वाली पीढ़ी के।

त्राहिमान! नववर्ष!!
आँख का पानी बचा रहे बस
यही अरदास तुझसे
यही प्रार्थना तेरी
यही कामना मेरी!!


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