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06.01.2008
 

नहीं छोडेंगे हम धूम्रपान कभी
रवि कवि


फूँकने का कर्तव्य है हमारा
और सहना धरम है तुम्हारा
कहीं भी कभी भी किसी भी हाल में
तलब मिटाना हमको खूब भाता है
बच्चें हों, बुजुर्ग हों, बीमार हों या भीड़ हो
बेशक पर्यावरण का कितना भी सर्वनाश हो

अरे भाई पढे लिखे हैं हम बहुत
यह विज्ञापन और प्रतिबन्ध
भला हमको कोई रोक पाएँगे
जान लीजिये यह ज़रूरी बात
की धूम्रपान उतना ही ज़रूरी है हम लोगों के लिए
जितना शरीर में आत्मा का होना ज़रूरी है

यूँ भी यह कोई इतनी बुरी चीज़ नहीं
शान औ शौकत के अंदाज़ हैं
बड़े बड़े लोग करते है
या यूँ कहिये जो करते है
वो ही बड़े हो जाते है
क्या अदा किस मस्ती से और जूनून का
पूरा लुत्फ़ उठाते है

चिंता हो या कैसा भी दर्द
हर चीज़ में बड़ा सहारा मिलता है
वैसे भी जवानी का मतलब ?
बड़े हो गए है अब आज़ाद परिंदे हैं
सिगरेट के हर कश से नई नई
ल्पनाओ को ऊँची उड़ान मिलती है
रोब और ताकत का सर्वोत्तम विकल्प है ये

अब आप चाहे
कितनी भी बड़ी बीमारियों का वास्ता दीजिये
डरा लीजिये, समझा लीजिये
कानून पर कानून खूब बना लीजिये
परन्तु इतना हमारा भी सुन लीजिये
की धूम्रपान बेहद ज़रूरी है
चाहे हमको आप कितना भी
ख़ुद में कमजोर कह लीजिये
पर हमें कोई ताकत
नहीं रोक सकती ऐसा करने के लिए
बेशक कल को हमारे बच्चे
रोग लेके जन्में हमारी वजह से
और बेचारे कितने भी बन जाएँ
मरी हमारे धुँये की वजह से
ये इन सबका नसीब है
हमको क्या मतलब दूसरों की ज़िन्दगी से
जो होना हो
होए हमारी बाला से
हमें जीवन मिला है
भगवन की कृपा से
और हम जियेंगे इसको सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी तरह से
कोई कर्तव्य और कोई धरम और कोई बोल बचन
हमको बाँध नहीं सकते
                  धूम्रपान रोकने की प्रतिज्ञा से....!


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