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06.01.2008
 

जननी के सम्मान की खातिर
रवि कवि


हम नारी हैं
हम नारी हैं
हम नारी हैं
देश को आगे ले जाने की
अब हमारी बारी है
शक्ति की परिभाषा हैं हम
धैर्य की पुजारिन है
रिश्तों में गूँथने वाली
माला में डोर भी हमारी है
होंसलों के आगे हमारे हर चट्टान टूटी है
नारी को कमज़ोर न समझो
मिटटी की मूरत ना समझो
अब परिवर्तन की राह पे हमको चलना है
अधिकार अपने पाने को
पूरी ताकत से लड़ना है
जननी के सम्मान की खातिर
आगे हम अब आए हैं
यह मत भूलो तुम
की नारी बिन पृथ्वी सूनी है
माता पत्नी और बेटी के रूप में
सृष्टि की जननी है
हम नारी हैं
हम नारी हैं
हम नारी हैं
देश को आगे ले कर चलने की
अब हमारी बारी है


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