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01.08.2008
 

रिश्ते
डॉ. रति सक्सेना


कुछ रिश्ते
तपती रेत पर बरसात से
बुझ जाते हैं,
बनने से पहले
रिश्ते
ऐसे भी होते हैं
चिनगारी बन
सुलगते रहते हैं जो
जिन्दगी भर
चलते साथ कुछ कदम
कुछ रुक जाते बीच रास्ते
रिश्ते होते हैं कहाँ
जो साथ निभाते हैं
सफर खत्म होने तक


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