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ISSN 2292-9754

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08.04.2014


जीवन

जीवन के सुर सागर में लहरों का होता उद्भव,
जीवन के सुर सागर में आते कितने विप्लव।

अग्रसर है जीवन जल की धारा जैसे,
चल रहा जीवन कोटि- कोटि योजन ऐसे।

कर्त्तव्यों का, अधिकारों का बाना पहनें,
जीवन से ये लिप्त आभूषण, गहनें।

व्यक्तित्व की खोज में कोसों चलता जीवन ,
आन, मान व शान के प्रति उत्सुक जीवन।

सन्दर्भों व प्रसंगों में बंटता यह जीवन,
व्याख्याओं के बाँध पुल, अग्रसर जीवन।


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