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| 02.09.2008 |
| स्पर्श रंजना भाटिया |
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काँपती साँसें
लरजते होंठ आँखों में है एक दबी सी ख़ामोशी क्या वो तुम नहीं थे? जिसने अभी छुआ था मुझे संग बहती हवा के !! |
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