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03.08.2008
 
होली का रंग
रंजना भाटिया

होली का रंग बिखरा है चारों ओर
आज कुछ ऐसी बात करो
रँग दो अपने प्यार के रंगों से
उन्हीं रंगो से मेरा शिंगार करो........

रहो मेरे दिल के पिंजरे में,
और नज़रों से मुझको प्यार करो.
दो मेरी साँसो को अपनी धड़कनों की लय
आज फिर कुछ ऐसी कोई बात करो..........

रहो मेरी बाहों कि परिधि में,
और टूट कर मुझको प्यार करो,
आज मैं "मैं" ना रहूँ, आज मैं "तुम" हो जाऊँ
अपने प्यार से ऐसा मेरा शिंगार करो.........

लिख दो मेरे कोमल बदन पर
अपने अधरों से एक कविता.
जिसके "शब्द' भी तुम हो, और "अर्थ" भी तुम हो,
बस ऐसा मुझ पर उपकार करो......

तेरी 'मुरली कि धुन सुन कर..........
मन आज कुछ ऐसा भरमाये......
हृदय की पीरा, देह कि अग्नि,
रंगो में घुल जाए..
होली का रंग-रास आज फिर से "महारास" हो जाए,
रँग दो आज मुझको अपने प्यार के रंग में..
प्रियतम ऐसी रंगो कि बरसात करो..........

होली का रंग बिखरा है चारों ओर
आज कुछ ऐसी बात करो......
रँग दो अपने प्यार के रंगो से......
उन्हीं प्यार के रंगो से आज फिर तुम मेरा शिंगार करो........


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