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| 02.09.2008 |
| हरसिंगार रंजना भाटिया |
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लरजते अमलतास ने
खिलते हरसिंगार से ना जाने क्या कह दिया बिखर गया है ज़मीन पर उसका एक-एक फूल जैसे किसी गोरी का मुखड़ा सफ़ेद हो के गुलाबी-सा हो गया !! |
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