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06.17.2007
 
बिन तुम्हारे
रंजना भाटिया

बिन तुम्हारे
मैं और मेरा जीवन रीता,
हर युग में तुम साथ थे मेरे,
युगों से ये प्यार हमारा,
जैसे पावन गीता

सतयुग में, मैं लक्ष्मी थी तुम्हारी,
फिर अगले युग में तुम्हारी सीता,
द्वापर में राधा बन आई पास तुम्हारे....
फिर कलयुग क्यूँ बिन तेरे, जाये बीता.....??


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