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06.17.2007
 
अहसास
रंजना भाटिया

कल रात का अहसास कुछ अजीब था,
तू जैसे दिल के बहुत करीब था,
तेरी साँसों का आना जाना, महसूस किया था मैंने,
अपने जिस्म को तेरी बाहों में पिघलते हुए देखा था मैंने...
टूट कर प्यार किया था तुझे मैंने....
तेरे साथ बीते हर पल को जिया था मैंने...
पर...
सुबह होते ही एक ख़्‍वाब की तरह बिखर गया था तू...
और अपने टूटे हुए दिल के ज़ख़्‍मों को फ़िर सी लिया था मैंने।


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