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05.03.2012
 
उजाले
रामेश्वर कम्बोज हिमांशु

उम्र भर रहते नहीं हैं
संग में सबके उजाले ।
हैसियत पहचानते हैं
ज़िन्दगी के दौर काले ।

तुम थके हो मान लेते-
हैं सफ़र यह ज़िन्दगी का।
रोकता रस्ता न कोई
प्यार का या बन्दगी का।

हैं यहीं मुस्कान मन की
हैं यहीं पर दर्द-छाले।
तुम हँसोगे ये अँधेरा,
दूर होता जाएगा।

तुम हँसोगे रास्ता भी
गाएगा मुस्कराएगा।
बैठना मत मोड़ पर तू
दीप देहरी पर जलाले।
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