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05.03.2012
 
सदा कामना मेरी
रामेश्वर कम्बोज हिमांशु

सदा कामना मेरी -
कुछ अच्छा करने की
सबक दुख हरने की।
हर फूल खिलाने की
हर शूल हटाने की।

सदा कामना मेरी -
हरियाली ले आऊँ
खुशहाली दे पाऊँ।
नेह नीर बरसाऊँ
धरती को सरसाऊँ।

सदा कामना मेरी -
मैं सबकी पीर हरूँ
आँधी में धीर धरूँ।
पापों से सदा डरूँ
जीवन को नया करूँ।

सदा कामना मेरी -
नन्हीं पौध लगाऊँ
सींच-सींच हरसाऊँ।
अनजाने आँगन को
उपवन-सा महकाऊँ।

सदा कामना मेरी -
हर मुखड़ा दमक उठे।
आँखें सब चमक उठें।
अधर सभी मुसकाएँ
मीठे गीत सुनाएँ।

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