अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
05.03.2012
 
सबसे प्यारे
रामेश्वर कम्बोज हिमांशु

सूरज मुझको लगता प्यारा
लेकर आता है उजियारा ।
सूरज से भी लगते प्यारे
टिम-टिम करते नन्हें तारे।

तारों से भी प्यारा अम्बर
बाँटे खुशियाँ झोली भर-भर।
चन्दा अम्बर से भी प्यारा
गोरा चिट्टा और दुलारा।

चन्दा से भी प्यारी धरती
जिस पर नदियाँ कल-कल करती ।
पेड़ों की हरियाली ओढ़े
हम सबके है मन को हरती ।

हँसी दूध –सी जोश नदी –सा
भोले मुखड़े मन के सच्चे ।
धरती से प्यारे भी लगते
खिल-खिल करते नन्हें बच्चे ।

इन बच्चों में राम बसे हैं
ये ही अपने किशन कन्हाई ।
इन बच्चों में काबा-काशी
और नहीं है तीरथ है भाई ।
अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें