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05.03.2012
 
जीवन के ये पल
रामेश्वर कम्बोज हिमांशु

जीवन के ये प्यारे पल
आज नहीं तो फिर ये कल।
बह जाएँगे इन हाथों से
करते कल-कल छल-छल।।
जिन्हें छोड़ दें वे मुस्काएँ
दुख की धूप कभी न आए।
जो मिल जाएँ आगे पथ में
उनके लिए भी कुछ कर जाएँ।।
अपना जीवन लुटाते जाना
खोना-खोना, कुछ न पाना।
दर्द उठे फिर-फिर मुस्काना
आँसू आए गीत सुनाना।।
नन्हीं कलियाँ गले लगाकर
ख़ुशबू के नग़में बन जाना।
कोयल जागे तो जग जाना
कोयल सोए तो सो जाना।।
अपना मन तो बिल्कुल जोगी
जंगल और वीराना क्या।
भीड़ नगर की नहीं खींचती
महलों का मिल जाना क्या।।
फुटपाथों पर नींद थी आई
गद्दों पर हम रातों जागे।
माया भागी पीछे-पीछे
हम तो भागे आगे-आगे।।

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