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| 02.16.2009 |
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बच्चे
और
पौधे रामेश्वर कम्बोज ‘हिमांशु’ |
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लहलहाते
रहेंगे आँगन की क्यारियों में हिलाकर नन्हें-नन्हें पात सुबह शाम करेंगे बात प्यारे पौधे। पास आने पर दिखलाकर पँखुड़ियों की नन्हीं-नन्हीं दन्तुलियाँ मुस्काते हैं फूले नहीं समाते हैं ये लहलहाते पौधे। मिट्टी पानी और उजाला इतना ही तो पाते फिर भी रोज़ लुटाते कितनी खुशियाँ --- बच्चे---- ये भी पौधे हैं इन्हें भी चाहिए - प्यार का पानी मधुर - मधुर स्पर्श की मिट्टी और दिल की खुली खिड़कियों से छन - छन कर आता उजाला तब ये भी मुस्काएँगे अपनी किलकारियों का रस ओक से हमको पिलाएँगे जब भी स्नेह - भरा स्पर्श पाएँगे बच्चे पौधे, पौधे बच्चे बन जाएँगे घर आँगन महकाएँगे। |
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