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ISSN 2292-9754

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01.27.2016


बाल कविताएँ - 3

11
मुर्गा बोला
मुर्गा बोला ­ कुकुड़ू कूँ
जाग उठा, सोता तू।
सूरज भी अब जाग गया
दूर अँधेरा भाग गया।
बिस्तर छोड़ो उठ जाओ
मुँह धोकर बाहर आओ।

12
माली
सींच –सींचकर हर पौधे को
हरा-भरा करता है माली
रंग-बिरंगे फूलों से नित
बगिया को भरता है माली
हर पौधे से और पेड़ से
बगिया में होती हरियाली।

13
मोर
आसमान में उड़ते बादल
घुमड़-घुमड़ जब करते शोर।
रंग –बिरंगे पंख खोलकर
खूब नाचता है तब मोर।

14
माता-पिता

माता-पिता बहुत ही अच्छे
जी भर करते हमको प्यार।
सुबह जागकर सबसे पहले
उन्हें करते हम नमस्कार ॥

15
बापू
सबसे मिलकर रहो प्रेम से
पाठ पढ़ाया बापू ने।
‘आज़ादी लेकर मानेंगे’
हमें सिखाया बापू ने।


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