अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
05.03.2012
 
बाल कविताएँ - 2
रामेश्वर कम्बोज हिमांशु

6
चाचा जी का बन्दर

चाचा जी ने पाला बन्दर ।
करता है वह खों-खों दिन भर।
जहाँ कहीं शीशा पा जाता
दाँत दिखाता मुँह बिचकाता
आँगन के पेड़ों पर चढ़ता ।
फल तोड़ता ऊधम मचाता।

7
तारे

आसमान की चादर ताने
बिखरे टिमटिम-झिलमिल तारे।
जैसे फूल खिले बगिया में
वैसे खिलते हैं ये सारे ।
सब सो जाते हैं जब थककर
ओस तभी बिखराते तारे।
हुआ सवेरा सूरज निकला
चुपके-से खो जाते सारे।

8
तितली रानी

तितली रानी तितली
कौन देश से आई हो ।
रंग- बिरंगे सुन्दर कपड़े
किस दूकान से लाई हो ?
फूल-फूल पर घूमा करती
सबके मन को भाई हो।

9
गुड़िया रानी

मेरी भोली गुड़िया रानी
सुनती मुझसे रोज़ कहानी।
आँखें नीली सुन्दर बाल
परियों जैसी इसकी चाल ।
बढ़िया जूते , कपड़े पहने
मेरी गुड़िया के क्या कहने

10
नन्हीं चींटी

कभी न थकती चलती रहती
नन्हीं चींटी ।
गरमी से घबराना कैसा
सरदी में रुक जाना कैसा
भूख- प्यास सब कुछ है सहती
नन्हीं चींटी ।
सीखो सदा प्रेम से रहना
हँसकर दुख सुख सारे सहना
‘मेहनत करके जिओ’-कहती
नन्हीं चींटी ।
अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें