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| 03.13.2009 |
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बाल कविताएँ - 2 रामेश्वर कम्बोज ‘हिमांशु’ |
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6 चाचा जी का बन्दर चाचा जी ने पाला बन्दर । करता है वह खों-खों दिन भर। जहाँ कहीं शीशा पा जाता दाँत दिखाता मुँह बिचकाता आँगन के पेड़ों पर चढ़ता । फल तोड़ता ऊधम मचाता। 7 तारे आसमान की चादर ताने बिखरे टिमटिम-झिलमिल तारे। जैसे फूल खिले बगिया में वैसे खिलते हैं ये सारे । सब सो जाते हैं जब थककर ओस तभी बिखराते तारे। हुआ सवेरा सूरज निकला चुपके-से खो जाते सारे। 8 तितली रानी तितली रानी तितली कौन देश से आई हो । रंग- बिरंगे सुन्दर कपड़े किस दूकान से लाई हो ? फूल-फूल पर घूमा करती सबके मन को भाई हो। 9 गुड़िया रानी मेरी भोली गुड़िया रानी सुनती मुझसे रोज़ कहानी। आँखें नीली सुन्दर बाल परियों जैसी इसकी चाल । बढ़िया जूते , कपड़े पहने मेरी गुड़िया के क्या कहने 10 नन्हीं चींटी कभी न थकती चलती रहती नन्हीं चींटी । गरमी से घबराना कैसा सरदी में रुक जाना कैसा भूख- प्यास सब कुछ है सहती नन्हीं चींटी । सीखो सदा प्रेम से रहना हँसकर दुख सुख सारे सहना ‘मेहनत करके जिओ’-कहती नन्हीं चींटी । |
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