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| 10.14.2007 |
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अक्कड़-बक्कड़ रामेश्वर कम्बोज ‘हिमांशु’ |
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अक्कड़-बक्कड़ बम्बे बो आसमान में बादल सौ । सौ बादल हैं प्यारे रंग हैं जिनके न्यारे । हर बादल की भेड़ें सौ हर भेड़ के रंग हैं दो । भेड़ें दौड़ लगाती हैं नहीं पकड़ में आती हैं । बादल थककर चूर हुआ रोने को मज़बूर हुआ । आँसू धरती पर आए नन्हें पौधे हरषाए । |
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