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05.03.2012
 

सपना तब तक ही सुंदर है
रमेश तैलंग


सपना तब तक ही सुंदर है।
जब तक आँखों के अंदर है।

खुशियों को सहेज कर रखना
उनके खो जाने का डर है।

बुरे वक़्त में दुःख ही है, जो
साथ निभाने को तत्पर है।

रिश्तों का बनना आसां है
रिश्तों का बचना दुष्कर है।

इंसानों की मुश्किल ये है
उनके भीतर हमलावर है।


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