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04.18.2014


नदी बहती रहे जब तक

नदी बहती रहे जब तक, नदी है।
रुकी तो सिर्फ कीचड़ से लदी है।

दुःखों के पार जाना ज़िन्दगी है,
सुखों में डूब जाना त्रासदी है।

मिटाने में जिसे लगता है एक पल,
बनान में उसे लगती सदी है।

यहीं पर एक दिन आती है आगे,
ये जो इंसान की नेकी-बदी है।

जहाँ जीवित है घर में एक बूढ़ा,
समझना सिर पे छाया बरगदी है।


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