अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
02.19.2015


होली

रंगों की बहार लाया, पानी की बौछार लाया,
बच्चों की कतार लाया, होली का त्योहार आया।

बड़े-बूढ़ों ने आपस में, खूब रंग जमाया,
इक-दूजे को गले लगाकर, सबने बैर भुलाया।

चुन्नू-मुन्नू की टोली ने, ऐसा हुड़दंग मचाया,
भर पिचकारी मार-मार, सबको खूब दौड़ाया।

मम्मी ने भी पापा को, जमकर गुलाल लगाया,
दादाजी ने भी नाचकर, सबको खूब हँसाया।

खीर, पकौड़े, गुजिया खाकर, सबको मज़ा आया।
होली है, भई होली है, मस्ती में सबने गाया।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें