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06.22.2008
 

कैसे कैसे लोग
रमेश कुमार


मुझे अच्छे लगते हैं
काम करते लोग
दुख, रोग, मानसिक पीड़ा से
लड़ाई करते लोग

ये संसार एक चक्रव्यूह है
इसमें फँसे हुए हैं लोग
बार-बार मरकर भी
क्यों जीना चाहते हैं लोग

हर जगह भारी भीड़ है
भीड़ में फँसना चाहते हैं लोग
लोभ, मोह, स्वार्थ के दलदल में
रहना चाहते हैं लोग

एक-दूसरे पर दोषारोपण करते
और स्वयं को पाक समझते लोग
इस रंग-बिरंगे संसार में
कुछ उजले-कुछ काले लोग


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