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09.01.2007
 
कल
रमेश देवमणि

 

सभी भाषाओं की

सभी शब्दों की

अपनी-अपनी अलग पहचान होती है।

मैं गुजराती हूँ

मेरी मातृभषा गुजराती में भी कल परसों के लिए

अलग शब्द है

कल के लिए गइकाल

परसों के ले लिए आवतीकाल

इन कल के भीतर

हम आज को भूल चुके हैं

आज कभी होती नहीं

हम सिर्फ़

कल में ही जीते हैं ज़िन्दगी।



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