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| 09.01.2007 |
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गुलाम रमेश देवमणि |
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जब
अपनी इच्छानुसार हो जाता है
तो
हम
बहुत खुश हो जाते हैं
जब
ऐसा नहीं होता
तब
हमें अच्छा नहीं लगता
मतलब
हमारा खुश होना
या
नाराज़
होना दूसरों की इच्छा पर निर्भर है
हक़ीकत
में हम गुलाम हैं दूसरों की मरजी के। |
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