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09.01.2007
 
अपनी ज़िन्दगी
रमेश देवमणि

 

आदमी के पास

अपनी ज़िन्दगी कब तक होती है

क्या जब तक रोशनी की खोज होती है?

हम अपने घरों में हैं या बाहर पता नहीं है

अंधेरों की आदत क्यों नहीं होती है?

अगर सोचा जाए तो ज़िन्दगी कभी आदत लगती है

मौसम बदलते रहते हैं

पर पूरे हम नहीं बदलते

शायद हमारे मन में अपनी ज़िन्दगी

जीने की पुरानी आदत बनी रहती है।



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