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| 09.23.2007 |
| बलिदान चाहिए डॉ. रमा द्विवेदी |
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मेरे देश को भगवान नहीं, सच्चा इंसान
चाहिए, इंसानियत विलख रही इंसान ही के
ख़ातिर, बचपन यहाँ पे देखो बंधुआ बना हुआ है, मुखौटोँ के पीछे क्या है कोई जानता
नहीं है, रोज़ मर रहे हैं यहाँ कुर्सी के
वास्ते, सदियों के बाद भी जो इंसान न बन सकी
है, मेहनत से नाता टूटा सब यूँ ही पाना
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