डॉ. रमा द्विवेदी


कविता

अनुभूति
अपना नहीं कोई है
करती है पानी-पानी
कुछ क्षणिकाएँ 'प्यार' पर
कैसे लाँघी- मर्यादा?
जीवन मूल्यों में विप्लव हो
पीड़ा को विश्व का साम्राज्य दो (गीत)
बलिदान चाहिए 
मुझको हरित बनाओ अब
मृत्यु - कुछ क्षणिकाएँ
हर साँस बंदी है यहाँ
होली गीत

कहानी

ऊर्जस्विता

पुस्तक समीक्षा

स्त्री विमर्श की कविताएँ
’दे दो आकाश’
- अशोक शुभदर्शी