डॉ. रमा द्विवेदी

कविता
5 क्षणिकायें
11-ताँका
अनुभूति
अपना नहीं कोई है
करती है पानी-पानी
कुछ क्षणिकाएँ 'प्यार' पर
कैसे लाँघी- मर्यादा?
जीवन मूल्यों में विप्लव हो
दस -हाइकु
पीड़ा को विश्व का साम्राज्य दो (गीत)
बलिदान चाहिए 
मुझको हरित बनाओ अब
मृत्यु - कुछ क्षणिकाएँ
रेखाएँ -  पंद्रह क्षणिकाएँ
हर साँस बंदी है यहाँ
होली गीत
कहानी
ऊर्जस्विता
पुस्तक समीक्षा
"साँसों की सरगम" : एक सुंदर हाइकु-संग्रह
स्त्री विमर्श की कविताएँ
दे दो आकाश
- अशोक शुभदर्शी

डॉ. रमा द्विवेदी के साहित्य में "भविष्य की नारी कल्पना" (शिल्पी "मंजरी")