कविता
अनुभूति
अपना नहीं कोई है
करती है पानी-पानी
कुछ क्षणिकाएँ 'प्यार' पर
कैसे लाँघी- मर्यादा?
जीवन मूल्यों में
विप्लव हो
पीड़ा को विश्व का साम्राज्य दो
(गीत)
बलिदान चाहिए
मुझको हरित
बनाओ अब
मृत्यु - कुछ क्षणिकाएँ
हर साँस बंदी
है यहाँ
होली
गीत
कहानी
पुस्तक समीक्षा
स्त्री विमर्श की कविताएँ
’दे दो आकाश’
- अशोक शुभदर्शी