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05.03.2012
 
दीपावली 2004
राकेश खण्डेलवाल

यायावरी शरद आया है, कुछ पल नीड़ बनाये
और आपके पथ में प्रतिदिन, नव पाथेय सजाये

दीपित होकर अमा, पूर्णिमा जैसे, गीत सुनाये
दीप जलें नित आशाओं के, पल न अंधेरा छाये

रंग धनक से सँवरें निशिदिन अँगनाई में आकर
हो साकार कामना, तुलसी चौरे ज्योति जगाये

पुरबाई नित करे आरती, मंगल गाये पछुआ
आशीषों के फूल आपके सिर पर विधि बरसाये

दीपावली की हार्दिक शुभ कामनायें

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