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06.13.2007
 
नव वर्ष
राकेश खण्डेलवाल

भोर हर एक सिन्दूरी हो आपकी, साँझ हर, सुरमई रंगमय हो ढले
आपकी रात की वीथियों में सदा, जगमगाते सितारों के हों काफ़िले
स्वप्न के चित्र सब, शिल्प बनते रहें, कामनाओं का श्रृंगार होता रहे
इस नये वर्ष में थाम पुरबाई को, दिन का हर पल गुलाबों सरीख खिले

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