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ISSN 2292-9754

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10.01.2014


सूखा आया तो कुछ...

सूखा आया तो कुछ तनकर बैठ गए
बाढ़ जो आई और अकड़कर बैठ गए

माँ की याद आने पर सारे लोग बड़े
छोटे-छोटे बच्चे बनकर बैठ गए

जिनके पैरों में थोड़ी हिम्मत कम है
वो तो थोड़ी देर ही चलकर बैठ गए

मंच पे रक्खी सबसे ऊँची कुर्सी पर
मंत्री जी जब गए तो अफसर बैठ गए

वो हक की आवाज़ उठाते जाऎँगे
वो हम जैसे नहीं कि डरकर बैठ गए

ज़िक्र वफ़ा का आया तो हम सब के सब
दीवारों के पीछे छुपकर बैठ गए


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