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ISSN 2292-9754

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03.28.2017


हिस्से की धूप

 लड़कियाँ ख़राब हो जाती हैं
जो कहना सीख जाती हैं
"नहीं"

जब उम्र में छोटे लेकिन –
घर के बड़े बेटे की प्लेट में
बचे आख़िरी दो निवाले
कहते हुए सरका दिए जाते हैं उसकी ओर
खा ले, अन्न बरबाद नहीं करते
और भैया तेरा ही है ना...

ख़राब लड़कियों के पैर
नहीं टिकते घर में
दौड़ लगाते हैं –
गली के आवारा लड़कों के संग
चोट लगने पर
आँखों में आँसू होते हुए भी हँसती हैं...

ख़राब लड़कियाँ नहीं चलतीं
सड़कों पर नज़रें झुकाकर
सनेटरी नैपकिन ख़रीद लाती हैं
साग सब्जी की तरह...

ख़राब लड़कियाँ विरोध करती हैं –
ससुराली संस्था का
जो मौजूद न होकर भी…
आड़े आता है उसके हर फ़ैसले में
मैनेज करता है उसकी
हर छोटी बड़ी आदतों को...

ख़राब लड़कियाँ अक्सर
मुद्दा बनती हैं
कभी-कभी मनोरजन का विषय भी
पड़ोस की आँटियों के बीच...

बावजूद
ख़राब लडकियाँ
क़दम-दर-क़दम करती हैं संघर्ष


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