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03.26.2014


साँझ के अँधेरे में

साँझ
के झुटपुट
अँधेरे में
दुआ के लिए
उठा कर हाथ
क्या
माँगना
टूटते
हुए तारे से
जो अपना
ही
अस्तित्व
नहीं रख सकता
कायम
माँगना ही है तो माँगो
डूबते
हुए सूरज से
जो अस्त हो कर भी
नही होता पस्त
अस्त होता है वो,
एक नए सूर्योदय के लिए
अपनी स्वर्णिम किरणों से
रोशन करने को
सारा जहान


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