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05.15.2014


पहला क़दम

फूलों से नाज़ुक पाँव से
ठिठक ठिठक कर
डगमगाते क़दमों से
चलने का प्रयास
पाँव ने अभी अभी तो
धरती पर टिकना सीखा है
गिरते, उठते
लचकते, संभलते
फिर चलते
ममत्व का हाथ थामे
आँखों मैं मूक अनुमोदन
की आस
ममत्व और स्नेह से
संबल लेता
प्रयास
सफलता की किलकारी
पायल की रुनझुन से
गूँज उठती
घर फुलवारी


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