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ISSN 2292-9754

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12.19.2014


मन के बंद दरवाज़े

इस से पहले कि
अधूरेपन की कसक
तुम्हें कर दे चूर चूर
ता उम्र हँसने से
कर दे मजबूर
खोल दो
मन के बंद दरवाज़े
और घुटन को
कर दो दूर

दर्द तो हर दिल में बसता है
दर्द से सबका पुश्तैनी रिश्ता है
कुछ अपनी कहो, कुछ उनकी सुनो
दर्द को सब मिलजुल कर सहो

इस से पहले कि दर्द
रिसते रिसते, बन जाये नासूर
लगाकर हमदर्दी का मरहम
करो दर्द को कोसों दूर

बाँट लो,सुख-दुःख को
मन को, जीवन को
स्नेहामृत से कर लो भरपूर
खोल दो मन के बंद दरवाज़े
और घुटन को कर लो दूर


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