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03.02.2008
 

ये किसका खून बह रहा है, दोस्तो!
डॉ. राजेश कुमार


ये किसका खून बह रहा है, दोस्तो!
और किसका जम गया है, दोस्तो!

छोड़ आए जो वहशियत जंगल में
कौन उसे फिर उठा लाया है, दोस्तो!

जो बधावे जन्म पर होते थे
कौन मरने पर बजाता है, दोस्तो!

दुस्साहस कहाँ से आ रहा है ढेर सारा
आदमी ही आदमी को जलाता है, दोस्तो!

जल रही है आग बुझ भी जाएगी
जलन जी की मगर कहाँ जाएगी, दोस्तो!

मोहन के सब पाठ भुला कर आज
कौन हिटलर की याद दिलाता है, दोस्तो!


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