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03.02.2008
 

दस बूँदें
डॉ. राजेश कुमार


वर्षा की पहली बूँद मिट्टी पर पडी - टप!
सूखी मिट्टी में जीवन आ गया।
वर्षा की दूसरी बूँद पेड़ पर पड़ी - टप!
पेड़ हरा-भरा हो गया।
वर्षा की तीसरी बूँद फूल पर पड़ी - टप!
फूल खिल गया।
वर्षा की चौथी बूँद मोर पर पड़ी - टप!
मोर प्रसन्न होकर नाचने लगा।
वर्षा की पाँचवी बूँद पक्षी पर पड़ी - टप!
पक्षी की प्यास बुझ गई।
वर्षा की छठी बूँद फसल पर पड़ी - टप!
फसल लहलहा उठी।
वर्षा की सातवीं बूँद पहाड़ पर पड़ी - टप!
पहाड़ प्रफुल्लित हो उठा।
वर्षा की आठवीं बूँद तालाब में पड़ी - टप!
तालाब खुशी से भरा उठा।
वर्षा की नौवीं बूँद सीप में पड़ी - टप!
सीप ने मोती बना दिया।
वर्षा की दसवीं बूँद मिट्टी आदमी पर पड़ी - टप!
आदमी ने छतरी खोल ली।


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