अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
04.01.2015


चुम्बन

छू कर अधरों से
किसलयों को प्रथम
स्निग्ध स्पर्श से
पल्लवित किया था
माँ की ममता ने

द्वितीय अधरों का
छुअन संतप्त
जीवन-संगिनी का था
संतृप्त तन-मन
पुष्पित हुआ था हृदय
लद गए फल सरस

तृतीय छुअन था
संतति का सुकोमल
अजस्र स्रोत
फूटा करुणा का
परिपूर्ण हुआ जीवन
मधुमय संसार


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें