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ISSN 2292-9754

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04.01.2015


अर्थ - पिशाच

क्रूर कदमों तले
मर्दित असंख्य सुमनोहर
आशाओं की कलियाँ
निरीह स्वांसें नृशंस चुंगुल में
आहत दुर्दांत दमन से
क्षत-विक्षत रक्त-रंजित सपने
अभाव की आग में झुलसी
सुकोमल पंखुड़ियाँ उम्मीदों की
झाँकती झुर्रियाँ पैबंद से
फटी बिवाईयों की आहें
कराह मर्मान्तक पीड़ा की ,
धमनियों में धधकती
विस्फोटक ज्वाला भूख की
कसमसाती दौड़ती
खाली अँतड़ियों में
हो रहा जीवन कठिन
इधर तांडव दानव का
रक्त पिपासु मानव भक्षक
कर रहे गर्जन अर्थ-पिशाच
उगल रहे वायरस विभिन्न -
विषाणु महत्तवकांक्षा के
सत्ता-विस्तार के,
वर्चस्व की लिप्सा
पसरती जा रही ब्रह्माण्ड में
मिथाइलआइसोसायनेट बनकर।


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