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| 03.15.2008 |
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कैद प्यार |
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आँखें लड़ी हिया में उठने लगा ऊँच ऊँच हिलोर बातें यों फैल गयी मानो जंगल में लग गयी लुट्टी वो क्षण किसीने न जाना जब आँखें हुई थी चार कैद पiरंदा होता है गगन पर किसका जोर चला है हर विकट घेरे में भी छिपा रहता है जरूर एक मौका कल आग लगी मेरे मरई में ठीक हुआ सब राख हुआ |
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