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03.15.2008
 

जोकर
प्रो. राजकिशोर प्रसाद


जो जी आए करता जोकर
हँसता और हँसाता जोकर
बातों से गुदगुदी लगाता जोकर
हँसते श्रोता दुनिया खोकर।

उछल कूदकर दिखता बन्दर
तन रंग बिरंगे कपड़ों से ढककर
गजब गजब ठिठोली करता जोकर
हँसते श्रोता दुनिया खोकर।

बतलाता बातें गम्भीर ठिठोली में
रख चाँद को अपनी हथेली में
सबको दर्पण दिखलाता जोकर
हँसते श्रोता दुनिया खोकर।

काम जोकर का आसान नहीं है
लोगों के अधरों पर मुस्कान नहीं है
फिर भी कोई हँसा दे केवल कुछ कहकर
काम कठिन वह करता है जोकर।


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