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ISSN 2292-9754

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12.29.2014


हज़ारों वर्षों की कमाई

हज़ारों वर्षों की कमाई
बेशर्मी-बेहयाई
लूट-पाट, चोरी-डकैती, आवारागर्दी
अपनी-अपनी ड्यूटी बजा रहे हैं बिल्ला-वर्दी
और
दुर्योधन-दुःशासन होकर सवार उनके सीने पर
करते हैं अट्टहासें
फेंकते हैं गर्म-गर्म साँसें
जीती-जागती ज़िंदगी, ज़िंदा लाश हो जाती है
हँसती-खिलखिलाती खुशी, चुप-उदास हो जाती है

अतिथि का इस धरती पर अब ऐसा सत्कार होता है
कि भूल से- भ्रम से राह भटकी हुई
किसी अजनबी महिला के साथ बलात्कार होता है

हज़ारों वर्षों की कमाई
बेशर्मी ‌‌‌- बेहयाई....


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