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ISSN 2292-9754

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08.03.2014


हर तरफ़ है छिड़ी समय को..

हर तरफ़ है छिड़ी समय को भुनाने की ज़िरह
कल का सौदा टके का, आज बेशकीमती है

कल था नवरात्र तो महँगी थी देवियों की शकल
आज दीवाली में लक्ष्मी-गणेश कीमती हैं

कल की मंदी में तो सूरज भी बिका धेले में
बचे हैं जुगनूँ जो भी आज शेष, कीमती हैं

जब तलक मालिक-ए-गद्दी(गड्डी) थे ताव से सोये
सर पे जब आ गया चुनाव, देश कीमती है

वो अलग दौर था जब राम की जय बोलते थे लोग
आज की लीला में लंका-नरेश कीमती है


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