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ISSN 2292-9754

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09.04.2014


हमने उनके वास्ते सब कुछ गँवाया

हमने उनके वास्ते सब कुछ गँवाया
क्या इसी दिन के लिए

वे हमें अब मारते-दुत्कारते हैं
हम सदा जीते रहे जिनके लिए

तंगहाली में लिया था कर्ज़ जिसका
ब्याज भी वे आज गिन-गिन के लिए

ज्ञान ऊधौ पास ही रखिए
न कोई प्रेम का है मोल गोपिन के लिए

अन्न के दाने उठाते हाथ बूढ़े सोच लो
अपने लिए या नात-नातिन के लिए


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