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ISSN 2292-9754

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06.15.2014


दु:ख का कारण

मेरे दुःख का कारण
क्या है, कौन है
किसको मारूँ, किसको बोलूँ !
उम्र के इसी पड़ाव पर
मैंने देखे कितने दुर्दिन
मन करता है जी भर रो लूँ !

क्या छिपाऊँ क्या दिखाऊँ
किसको दूँ किससे चुराऊँ
अपने-पराये का भेद सालता है जब
सोचता हूँ चलकर कहीं
जंगल में धन गठरी खोलूँ !

अंधा मैं सोचता रहा
सारा जग अंधा है
हो रहा जो वही
सही रीत-सही धंधा है
चोर मन सोचता है अँधियारे में जागूँगा
जागते हैं जब तक सभी
तब तक मैं सो लूँ


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