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03.15.2014


आग

दिवाली की रात को मैं अपने गाँव के युवा मंडल के कार्यालय में अपने युवा साथियों के साथ बैठा था। तभी हमें पता चला कि गाँव में आग लग गयी है। मैंने सभी युवाओं को आग बुझाने के लिए दौड़कर जाने को कहा। सभी युवा आग लगे स्थान की तरफ भागे। किन्तु एक युवक बड़ी मस्त चाल से चल रहा था।

मैंने उसे भी दौड़कर चलने को कहा तो वह बोला- "भागना किस लिए है? अपने को तो तमाशा देखना है कुछ क्षण बाद देख लेंगे।" तभी उसके भाई की लड़की दौड़ती हुई आयी और युवक को सम्बोधित करते हुए बोली- "चाचा, अपने घर में आग लग गयी है।"

लड़की की बात सुनते ही युवक बेतहाशा दौड़ने लगा। क्योंकि अब उसका अपना घर जल रहा था।


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