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02.22.2008
 
तुम्हारे अस्तित्व की जननी हूँ मैं
रचना सिंह

पार्वती भी मैं
दुर्गा भी मैं
सीता भी मैं
मंदोदरी भी मैं
रुक्मनी भी मैं
मीरा भी मैं
राधा भी मैं
गंगा भी मैं
सरस्वती भी मैं
लक्ष्मी भी मैं
माँ भी मैं
पत्नी भी मैं
बहिन भी मैं
बेटी भी मैं
घर मे भी मैं
मंदिर मे भी मैं
बाजार मे भी मैं
"तीन तत्वों " मे भी मैं
पुजती भी मैं
बिकती भी मैं
अब और क्या
परिचय दूँ
अपने अस्तित्व का
क्या करूँगी तुम से
करके बराबरी मैं
जब तुम्हारे
अस्तित्व की
जननी हूँ मैं
तुम जब मेरे बराबर
हो जाना तब ही
मुझ तक आना

पार्वती माता का प्रतीक
दुर्गा शक्ति का प्रतीक
सीता, मंदोदरी, रुकमनी भार्या का प्रतीक
मीरा, राधा प्रेम का प्रतीक
गंगा, पवित्रता का प्रतीक
सरस्वती, ज्ञान का प्रतीक
लक्ष्मी, धन का प्रतीक
बाजार, वासना का प्रतीक
तीन तत्व: अग्नि, धरती, वायु


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