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| 07.14.2007 |
| हम किराये पर लेते
हैं विदेशी कोख रचना सिंह |
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हम बहुत तरक्की कर रहें हें
पहेले बेटियों को मारते थे बहुओं को जलाते थे अब तो हम कन्या भ्रूण हत्या करते हैं दूर नहीं है वो समय जब हम फ़ख़्र से कहेंगे पुत्र पैदा करने के लिये हम किराये पर लेते हैं विदेशी कोख |
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